Bhajans
Saturday, 19 September 2015
Shlokas
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
Gaayiye Ganapati Jagavandan
गाइये गणपति जगवंदन (२)
शंकर सुवन भवानी नंदन
गाइये गणपति जगवंदन
सिद्धि सदन गजवदन विनायक (२)
कृपा सिन्धु सुन्दर सब लायक
गाइये गणपति जगवंदन
मोदक प्रिय मुद मंगल दाता (२)
विद्या वारिधि बुद्धि विधाता
गाइये गणपति जगवंदन
मांगत तुलसी दस कर जोरे (२)
बसहुँ राम-सिय मानस मोरे
गाइये गणपति जगवंदन।
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